रविवार, 26 अक्टूबर 2014

देखेंगे कि एक ठीकठाक लेखक, कैसा ब्लॉगर बन पाता है..?

  • पीयूष द्विवेदी भारत 
अबतक तो इस ब्लॉग पर सिर्फ वह लेख आदि ही डालता था जो कहीं प्रकाशित हों या न हों, इसके अलावा इस ब्लॉग का अन्य कुछ लिखने के लिए कभी कोई प्रयोग नहीं किया. पर यूँ ही एक रोज सूझा कि क्यों न इसके प्रयोग क्षेत्र को थोड़ा और विस्तार दिया जाय, क्यों न इसे अपने सामान्य और दैनिक जीवन में होने वाले अनुभवों को बांटने का माध्यम भी बनाया जाए, जैसा कि तमाम ब्लॉगर मित्र करते हैं. अब जब ये सूझा तो करने की बेचैनी भी आई..पर इसके लिए जरूरी था कि सबसे पहले इसका नाम बदले. कोई अच्छा नाम जो थोड़ा अलग भी हो और सार्थक भी. तो कुछ मित्रों से सलाह-मशवरे व कुछ अपनी बुद्धि के प्रयोग  से निकला ये नाम - ममक्षर. ममक्षर अर्थात मेरे अक्षर...! अपने पुराने नाम के साथ यह ब्लॉग मेरे अखबारों  व पत्रिकाओं आदि के लेखन का एक संग्रहालय मात्र था और अब भी रहेगा..लेकिन अब उसके साथ-साथ कुछ दिल की बातें, कुछ बैठे-ठाले आए ख्याल, कुछ  यूँ ही देखा-सुना व ऐसी ही और तमाम चीजें भी इस ब्लॉग के पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करूँगा. बाकी देखने वाली बात यह होगी कि पाठकों की नज़र में ये एक ठीकठाक लेखक, कैसा ब्लॉगर बन पाता है..बन पाता है भी कि नहीं...




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