- पीयूष द्विवेदी भारत
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| डीएनए |
पाकिस्तान द्वारा जम्मू में
अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर जिस तरह से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए हमला किया
जा रहा है, वह न सिर्फ चिंताजनक है बल्कि कई प्रश्न भी खड़े करता है. वैसे तो
संघर्ष विराम का ऐलान होने के बाद से अबतक पाकिस्तान की तरफ से इतनी बार इसका
उल्लंघन किया गया है कि अब वो बस नाम के लिए ही रह गई. लेकिन फिर भी माना जा रहा है
कि अबकी पाकिस्तान जो संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है, वो २००३ के बाद का सबसे बड़ा
उल्लंघन है. पाकिस्तानी रेंजर्स की तरफ से लगातार मोर्टार समेत स्वचालित हथियारों
से हमला किया जा रहा है. इस हमले में सीमावर्ती क्षेत्र के निवासी पांच लोगों को
अपनी जान गंवानी पड़ी है साथ ही ३ दर्जन के आसपास लोग घायल भी हुए हैं. हालांकि
पाकिस्तानी रेंजर्स की तरफ से हो रही इस गोलीबारी का भारतीय सीमा सुरक्षा बल के
जवानों द्वारा पूरा जवाब दिया जा रहा है, जिसमे कि पाकिस्तान के भी नागरिकों के
हताहत होने की खबर है. लेकिन, दुर्भाग्य कि भारत को चोट पहुंचाने की कोशिश में लगे
पाकिस्तान को अपने नागरिकों तक की भी कोई परवाह नहीं है. अब यहाँ सवाल ये उठता है
कि आखिर वो क्या कारण है कि पाकिस्तान ने जम्मू में अचानक इतनी भीषण गोलीबारी, वो
भी वहां के नागरिकों को निशाना बनाकर, शुरू कर दी ? इस सवाल का जवाब तलाशने पर
स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान के इस भीषण हमले के पीछे का कारण उसकी खीझ है. इस खीझ
के भी कई कारण दिखते हैं. पहला कारण कि अभी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर समस्या का रोना रोया था, लेकिन भारतीय
प्रधानमंत्री मोदी के उस मसले को अंतर्राष्ट्रीय मंच से अलग रखने की बात के बाद
किसी अन्य देश ने पाकिस्तान की बात पर ध्यान नहीं दिया. परिणामतः कश्मीर समस्या के
अंतर्राष्ट्रीयकरण की पाकिस्तान की नापाक कोशिश एकबार फिर नाकाम हो गई. दूसरा
कारण, कि अभी जम्मू-कश्मीर में आई भीषण बाढ़ के दौरान जिस तरह से भारतीय सेना ने
वहां के लोगों की हिफाजत के लिए अपना खून-पसीना एक कर दिया, उससे भारत और भारतीय
सेना के प्रति वहां के लोगों के नज़रिए में
बदलाव भी होने लगा है. साथ ही लोग वहां के कट्टरपंथी नेताओं की हकीकत को भी
इस बाढ़ में काफी हद तक समझ गए हैं. यह बात भी पाकिस्तान को नहीं पच रही. इसके
अलावा देश में जल्दी ही विधानसभा चुनाव होने हैं, तो कहीं न कहीं उनमे खलल डालने
के लिए आतंकियों को देश में घुसना भी पाकिस्तान की इस भीषण गोलीबारी का मकसद हो
सकता है. साथ ही, भारत-अमेरिका के बीच आतंकवाद से मिलकर लड़ने के लिए बनी सहमति से
भी पाकिस्तान को पीड़ा हो रही होगी. उपर्युक्त बातों से स्पष्ट होता है कि
अंतर्राष्ट्रीय मंच से लेकर कश्मीर में तक, हर मोर्चे पर भारत से पीटने के कारण
पाकिस्तान खीझ खाया हुआ है और इस गोलीबारी के जरिये वो अपनी इसी खीझ का इजहार कर
रहा है. संभवतः वह भारत समेत विश्व को यह सन्देश देना चाहता है कि अगर उससे
बात-चीत नहीं की जाएगी, तो वो ऐसे ही अशांति फैलाएगा. यह एक तरह से न सिर्फ भारत
बल्कि दुनिया को ब्लैकमेल करने जैसी नीति है. दरअसल, दिक्कत ये है कि भारत समेत
दुनिया के किसी भी विकासशील व विकसित देश की हालत पाकिस्तान जैसी नहीं है कि वो
बात-बात पर हथियार उठा ले. सभी देशों को अपने नागरिकों व देश की तरक्की आदि की
चिंता है, जबकि पाकिस्तान को अपने नागरिकों, उनके हितों आदि की कोई परवाह नहीं है.
वो तो बस युद्धोन्माद में जी रहा है. अगर ऐसा न होता तो विदेशों से मिलने वाले
पैसे का बड़ा हिस्सा वो विकास पर खर्च करने की बजाय हथियार खरीदने-बनाने में क्यों
खर्च करता ? यहाँ यह भी उल्लेखनीय होगा कि पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न
राष्ट्र है. और उसके सुरक्षा हालात ऐसे हैं कि आतंकी जब, जहाँ चाहें हमला करके
कब्ज़ा कर लेते हैं. ऐसे में यह अंदेशा कत्तई गलत नहीं है कि उसके परमाणु हथियार
आतंकियों के हाथ लग सकते हैं. और अगर ऐसा हुआ तो फिर दुनिया की क्या हालत होगी यह
कल्पना भी भयावह लगती है. कहने का अर्थ ये है कि आज पाकिस्तान न सिर्फ भारत बल्कि
समूची दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है. ऐसा खतरा जिसको समय रहते अगर नहीं
रोका गया तो वो दुनिया को आफत में डाल सकता है.
भाजपा जब विपक्ष में थी तो पाकिस्तान के संघर्ष
विराम के उल्लंघनों पर संप्रग सरकार को कड़ा रुख अख्तियार करने को कहती थी. लेकिन,
अब जब वो सत्ता है तो पाकिस्तान पर उसकी नीतियां भी कमोबेश संप्रग जैसी ही हैं.
संप्रग के समय भी पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब सीमा पर जवान देते थे और अब भी दे
रहे हैं. नया कुछ नहीं है. भाजपा सरकार को नीतियों में नयापन लाना चाहिए. कई ऐसी
चीजें हैं जिन्हें सरकार कर सकती है. भारत
सरकार को विश्व समुदाय को यह बात समझाने के लिए प्रयास करना चाहिए कि आज पाकिस्तान
सिर्फ भारत के लिए नहीं विश्व समुदाय के लिए खतरनाक हो चुका है. ऐसे में उसको ठीक
करने की जिम्मेदारी भी विश्व समुदाय की ही है. भारत की यह भी कोशिश होनी चाहिए कि
दुनिया के विकासशील व शांतिप्रिय देश पाकिस्तान के खिलाफ एक हो सकें और उसे मिलने
वाली आर्थिक मदद पर रोक लग सके. साथ ही, भारत को चाहिए कि वो खुद पाकिस्तान से
निपटने के लिए एक ठोस नीति बनाए. ऐसी नीति जिसमे वैश्विक, आर्थिक, रणनीतिक, आदि
तमाम बिन्दुओं पर पाकिस्तान को लेकर क्या और कैसा रुख रखना है, ये तय किया जाय. इन
चीजों को करके ही पाकिस्तान पर अंकुश स्थापित किया जा सकता है और इनके लिए जरूरत
है मजबूत इच्छाशक्ति की.

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