- पीयूष द्विवेदी भारत
गत वर्ष उड़ी हमले के बाद भारतीय जवानों ने जब सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये उसका बदला लिया था, तो देश में एक गजब के उत्साह और ऊर्जा का संचार हो उठा था। इसका कारण यह था कि तबसे पहले इस तरह की सैन्य कार्रवाई देश ने लम्बे समय से नहीं देखी थी। संप्रग सरकार के दस साल के कार्यकाल में देशवासियों ने सिर्फ पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम के उल्लंघन से लेकर पाक-प्रेरित आतंकियों द्वारा हमलों के पश्चात् सत्तापक्ष की कड़ी निंदा ही सुनी थी। कभी कोई ठोस कार्रवाई करने का साहस कांग्रेस-नीत संप्रग सरकार नहीं जुटा सकी थी।
जब मोदी सरकार सत्तारूढ़ हुई तो उसने पहले तो पाकिस्तान से मधुर सम्बन्ध बनाने की कोशिश की, मगर उसके बदले जब पठानकोट और उड़ी जैसे हमले सामने आए तो सरकार ने सेना को कार्रवाई की छूट दे दी। परिणाम तब सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में सामने आया था। आज उस सर्जिकल स्ट्राइक को एक वर्ष से भी अधिक समय हो गया है और इस दौरान जो चीज बदली है, वो ये कि अब हमारे जवान आए दिन उस तरह की कार्यवाहियां करने लगे हैं। अब पाकिस्तानी फायरिंग में अगर हमारा कोई जवान शहीद होता है, तो उसपर केवल कड़ी निंदा नहीं होती, बल्कि हमारे जवानों द्वारा उसका उसी ढंग से बदला लिया जाता है।
अभी बीते बुधवार को पाकिस्तानी रेंजर्स की फायरिंग में भारतीय सीमा सुरक्षा बल के हेड कांस्टेबल आर। पी। हाजरा शहीद हो गए थे। दुखद संयोग देखिये कि उस रोज उनका जन्मदिन भी था। मगर हमारे जवानों ने हाजरा की इस शहादत का बदला महज चौबीस घंटे के अंदर ले लिया। सीमा सुरक्षा बल के जवानों द्वारा पाकिस्तानी रेंजर्स के दो मचानों को लक्ष्य करके नष्ट कर दिया गया, जिसमें दस से बारह रेंजर्स के मारे जाने तथा कई पाकिस्तानी चौकियों के तबाह होने की खबर है। इससे पूर्व बीते वर्ष 23 दिसंबर को पाकिस्तानी गोलीबारी में भारत के चार जवान शहीद हुए थे, जिनका बदला 25 दिसंबर को भारतीय जवानों ने पाक द्वारा कब्जाए कश्मीर में घुसकर ले लिया था। बीते वर्ष की ऐसी ही कई और सैन्य कार्यवाहियां हैं, जो दिखाती हैं कि अब पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने में भारतीय जवान किसी भी तरह से हिचक नहीं रहे।
दरअसल हमारे जवान हमेशा से ऐसा करने में सक्षम थे, परन्तु पिछली सरकार के समय उन्हें कार्यवाही के लिए शायद पूरी छूट ही नहीं मिलती थी, जिससे वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते थे। मौजूदा सरकार में पहले की अपेक्षा अधिक छूट मिलने के कारण वे अब पाकिस्तान को जोरदार ढंग से जवाब दे रहे हैं।
गौर करें तो प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा भारतीय जवानों का सिर काटे जाने के मामले पर कहा था कि उनकी सरकार एक के बदले दस सिर लाएगी। अब सिर लाना तो खैर एक प्रतीकात्मक भाषा थी, लेकिन हमारे जवानों द्वारा जिस तरह से अब बदला लिया जा रहा, उसे देखते हुए कह सकते हैं कि मोदी अपनी बात पर एकदम खरे साबित हुए हैं। उन्होंने सेना में ऐसा मनोबल भर दिया है कि अब पाकिस्तानी सैनिकों की गोलियों से अगर हमारे एक आर. पी. हाजरा शहीद होते हैं, तो बदले में हमारे जवान पाकिस्तान के दस सैनिकों को ढेर कर डालते हैं। इसके अलावा घाटी में आतंकियों का सफाया करने के मामले में भी मौजूदा सरकार के कार्यकाल में काफी तेजी आई है। आंकड़ों के मुताबिक भाजपा नीत मोदी सरकार के 2014 से लेकर 2017 तक के कार्यकाल में हमारे सुरक्षाबलों ने 580 आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, कांग्रेस की यूपीए सरकार के 2010 से लेकर 2013 तक के कार्यकाल में 471 आतंकियों का ही खात्मा हो सका था। इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि मौजूदा सरकार में आतंकियों के प्रति भी हमारे जवान बिना कोई ढील बरते कार्यवाही करने में लगे हैं। आतंकियों के प्रति इस सख्ती का परिणाम यह हुआ है कि संप्रग सरकार की अपेक्षा मोदी सरकार के कार्यकाल में आतंकी घटनाओं में भी एक हद तक कमी आई है। आंकड़ों के मुताबिक़, संप्रग सरकार में 2010 से 2013 तक 1218 आतंकी घटनाएं हुईं। वहीं, मोदी सरकार के 2014 से 2017 तक के कार्यकाल में इनकी संख्या कम होकर 1094 पर पहुँच गयी है। अभी जिस तरह से आतंकियों के प्रति कार्यवाही हो रही है, उम्मीद कर सकते हैं कि आगे इस संख्या में और भी कमी आएगी।
उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हमारे सेना से लेकर सीमा सुरक्षा बल तक सभी जवानों का मनोबल बढ़ा है। यह मनोबल बढ़ने के पीछे सरकार की तरफ से कार्यवाही की छूट मिलना तो एक कारण है ही, साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा जिस तरह से विभिन्न पर्वों को जवानों के साथ सीमा पर मनाने का कार्य किया जाता है, जवानों का मनोबल बढ़ने में ऐसी पहलों का भी बड़ा योगदान है।

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